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‘स्मार्ट सिटी’ के कामकाज को नगर निगम के तहत लाने की मांग

‘स्मार्ट सिटी’ के कामकाज को नगर निगम के तहत लाने की मांग

‘स्मार्ट सिटी’ के कामकाज को नगर निगम के तहत लाने की मांगआगरा : स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पूरी तरह नगर निगम की सेवाओं और दायित्वों से संबंधित होने के बावजूद इसका क्रियान्‍वयन एक लिमिटेड कंपनी द्वारा कराए जाने को लेकर विरोध के स्वर उठे हैं।

सिविल सोसायटी आगरा के तत्वाधान में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साफ-सफाई, सड़क निर्माण, नाला आदि बनाने जैसे सामान्य कार्यों के लिए आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड जैसे निकाय के गठन की आवश्यकता नहीं है।

वक्ताओं ने कहा कि ऐसी कंपनियां जनहित के बजाय केवल मुनाफे पर ध्यान देंगी। वक्ताओं ने दावा किया कि कंपनी में सरकारी अधिकारियों के काबिज होने के बावजूद जन सहभागिता और जननियंत्रण से यह पूरी तरह से बाहर है। अधिकारी जो पद पर रहते हुए अपने दायित्वों को पूरा करने में अक्षम साबित हुए हैं, उन्हें ही अब कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल किया गया है। इसके अलावा एक ही व्यक्ति के दो पदों पर होने पर भी सवाल उठना लाजिमी है।

स्मार्ट सिटी योजना को सीधे तौर पर नागरिकों के आर्थिक और सामाजिक जीवन स्‍तर को प्रभावित करने वाली योजना के रूप में प्रचारित किए जाने को लेकर भी वक्ताओं ने चिंता जताई। इसके कार्य क्षेत्र में केवल 10 नगर निगम वार्ड तक ही सीमित रखा गया है जबकि जनप्रतिनिधियों द्वारा इसे पूरे महानगर का कल्‍याण करने वाली योजना के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फतेहाबाद रोड स्थित होटल काम्प्‍लेक्‍स पर ताज मेगा प्रोजेक्‍ट, प्रोपुअर प्रोजेक्‍ट और जेएनयूआरएम के तहत ड्रेनेज और सीवरेज प्‍लान पर बरती जा रही अनियमितताओं की ओर भी ध्यान खींचा गया।

सिविल सोसायटी की ओर से अधिवक्ता अभिनय प्रसाद, शिरोमणि सिंह, रमण भल्ला व अनिल शर्मा ने स्‍मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड के काम-काज और योजनाओं को मेयर और नगर निगम सदन के आधीन किए जाने की मांग की है।

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