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नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट अनियमितता मसले पर नीति आयोग को लिखी चिट्ठी

नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट अनियमितता मसले पर नीति आयोग को लिखी चिट्ठी

नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्टआगरा : आगरा सिविल सोसायटी ने नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट और इसके लिए गठित सरकारी कंपनी 'नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट कंपनी लि.' को लेकर अपनाई गई तमाम ‘कथित’ अनियमितताओं के संबध में नीति आयोग को एक पत्र भेजा है।

ध्यान रहे, पूर्व में भी सिविल सोसायटी ने 'नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट कंपनी लि.' को ‘मुखौटा’ कंपनियों के समकक्ष्‍ा बताते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन को पत्र लिखकर कंपनी और इसके निवेशकों के विरुद्ध जांच की मांग की थी।

सिविल सोसायटी के सचिव अनिल शर्मा ने बताया कि यह केवल एअरपोर्ट प्रोजेक्‍ट से जुड़ा हुआ मामला नहीं है बल्कि कुछ व्‍यक्‍तियों की राजनीतिक महत्‍वाकांक्षा को पूरा करने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई को गैरजरूरी क्षेत्र में निवेश करने के लिए की जा रही कोशिशों से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि करीब 4065 करोड़ की राशि का अलाभकरी योजना पर खर्च किया जाना कोई छोटा मामला नहीं है।

एअरपोर्ट के बारे में सिविल सोसायटी की ओर से कहा गया है कि यूपी सरकार ने विशेष उद्देश्‍य परक कंपनी का गठन कर सरकारी निवेश के सहारे ही जनता के धन से जेवर ग्रीनफील्‍ड इंटरनेशनल एअरपोर्ट को बनाए जाने को काम शुरू किया है जबकि यह एक ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट है और ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट के तहत बनाए जाने वाले इंटरनेशनल एअरपोर्ट के लिए निवेशकों से ही निवेश जुटाने थे। हालांकि, सरकार को कंपनी गठित कर व्‍यापार करने या किसी कार्य को पूरा कराने का अधिकार है किन्‍तु जेवर एअरपोर्ट के लिए गठित कंपनी उन आधारभूत औपचारिकताओं को भी पूरा नहीं करती जिनके न होने पर सामान्‍य निजी क्षेत्र के निवेशक की कंपनी को सरकार ‘मुखौटा कंपनी’ ठहरा देती रही है।

मसलन, कंपनी के पास न तो अब तक नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) का अपने प्रोजेक्‍ट 'ग्रीनफील्‍ड इंटरनेशनल एअरपोर्ट' के लिए ‘एनओसी’ है और न ही इसे बनाए जाने के लिए जमीन। यही नहीं, सरकार के दबाव के आधार पर कंपनी की ओर से जो भी प्रयास अब तक किए गए हैं, किसानों ने उनका विरोध ही किया है। कंपनी जिस दर पर जमीन खरीदना चाहती है, किसान उस दर पर बेचना नहीं चाहते हैं। भूमि से अपना हक खोने के लिए किसान शायद तैयार भी हो जाता किन्‍तु उसके सामने दिशाहीनता की स्‍थिति उपस्थित होने का संशय सबसे बड़ी दुविधा है।

सरकार की ओर से जमीन देने वाले किसानों के परिवार के एक सदस्‍य को नौकरी देने की बात भी कही जा रही है। किन्‍तु, अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं किया जा सका है कि किसे नौकरी दी जाएगी और कंपनी या राज्‍य सरकार में से कौन नौकरी देगा। अधिकांश किसान चाहते हैं कि जेवर तहसील की चकबन्‍दी हो जाए, खसरा-खतौनी ‘अपडेट’ किए जाएं जिससे कि जमीन के एवज में नौकरी पाने का हक परिवार के कई पात्रों के लिए संभव हो जाएगा।

इसके अलावा, प्रोजेक्‍ट के लिए उजड़ने वाले आठ गांवों के भूमिहीन किसानों के पुनर्वास और वैकल्‍पिक रोजगार को लेकर राज्य सरकार और निवेशक कंपनी के पास कोई योजना नहीं है। 

माना जा रहा है कि ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लि.' का गठन जनता के धन का उपयोग संभव करने के लिए किया गया है। मामले के जानकारों के अनुसार, भारत के निवेशक ही नहीं, अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार तक राज्य सरकार के इस प्रयास को केवल एक ‘राजनीतिक महत्‍वाकांक्षा’ को पूरा करने से अधिक नहीं मानते हैं। धन जुटाने के लिए सरकार ने अपने अलावा नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटा, ग्रेटर नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी व यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्‍ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी को कंपनी में भागीदार बनाया है। ये तीनो अथॉरिटी वर्तमान में अपनी साख के संकट से जूझ रही हैं और भूमि घोटाला, अधूरे प्रोजेक्‍ट तथा गैर जरूरी खर्च आदि के लिए ज्‍यादा चर्चा में रही हैं।

लगभग 1468 हैक्‍टेयर जमीन और उसे खरीदने के लिए 4065 करोड़ राशि का इंतजाम करना मौजूदा हालातों में असंभव तो नहीं लेकिन मुश्‍किल जरूर नजर आ रहा है।

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