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इश्केदिल की ‘उलझनें’

इश्केदिल की ‘उलझनें’दोनों एक झोंक में एकदूजे के पास आ गए और अचानक से उसके कांपते होंठों को उसके कोमल होंठो ने थाम लिया। उसकी आंखें बुझती चली गईं और अंदर मीठी सी तरंग दौड़ गई। अचानक से, उसने एक उत्सुकता में अपनी आंखें हल्के से खोलीं तो देखा क़ि दो आंखें उसे भी उस तरंगित दौर में बड़े प्यार से निहार रही थीं।

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प्रेम का भूगोल

भूगोल में, पहाड़ों से निकली नदी के समुद्र में मिलने तक की प्रक्रिया को, तीन अवस्थाओं में बांटा गया है। मुझे प्रेम की संपूर्णता में भी इन अवस्थाओं से साम्य नजर आया है हमेशा...

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बापू, शास्त्री और बिस्मिल की याद में हुआ कवि सम्मेलन

बापू, शास्त्री और बिस्मिल की याद में हुआ कवि सम्मेलनफरीदाबाद : लाल बहादुर शास्त्री, लाला लाजपतराय व पं. रामप्रसाद बिस्मिल की स्मृति में सैक्टर 19 स्थित आर्य समाज में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

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