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बड़े काम आता है तुलसी का पौधा

बड़े काम आता है तुलसी का पौधा

बड़े काम आता है तुलसी का पौधातुलसी के चमत्कारी गुणों से सभी परिचित हैं। धर्मशास्त्रों में तुलसी, पीपल, आंवला और बरगद आदि के धार्मिक महत्व को बखूबी समझाया गया है। इनके चिकित्सकीय और पर्यावरणीय महत्व पर भी काफी गहनता से विचार किया गया है। इन्हें किसी जाति और धर्म विशेष से न जोड़ते हुए इनके महत्व को समझने में ही हमारी समझदारी है।

तुलसी सभी प्रकार के कफ और वात विकारों में उपयोगी है। लेप के रूप में घाव, शोथ, सन्धि, पीड़ा और मोच आदि में इसका लेपन किया जाता है। अवसाद एवं निम्न रक्तचाप की स्थिति में इसे त्वचा पर मलने से तुरन्त स्नायु संस्थान सक्रिय हो जाता है। पेट दर्द, भूख का न लगना और आंतों में कीड़े होने जैसी स्थिति में भी तुलसी का प्रयोग बेहद लाभदायक होता है।

खांसी, दमा और रीढ़ की हड्डी में अकड़न हो तो तुलसी का रस लेने से बहुत लाभ मिलता है। मूत्रदाह व विसर्जन में कठिनाई हो, पित्ताशय की सूजन हो या फिर पथरी, तुलसी के बीज का चूर्ण बहुत ही लाभदायक साबित हुआ है। कुष्ठ रोग एवं विषम ज्वर को मिटाने में भी तुलसी का प्रयोग आश्चर्यजनक लाभ देता है। तुलसी मलेरियानिरोधी भी है। इसके पौधे घर के नजदीक लगाने से मच्छर नहीं आते हैं।

तुलसी का स्वरस कई जीवाणुओं के विरुद्ध भी सक्रिय पाया गया है। इसकी जीवाणुनाशक क्षमता कार्बोलिक अम्ल से छह गुणा अधिक होती है।

बच्चों को दस्त लगने पर तुलसी के बीज पीसकर गाय के दूध में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। बुद्धि बढ़ाने के लिए तुलसी के पांच पत्ते जल के साथ प्रतिदिन सुबह के समय लेना चाहिए। संधि शोध एवं गठिया के दर्द में तुलसी का पचांग चूर्ण गाय के दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है। पचांग चूर्ण में पौधे की जड़, तना, पत्ती, मंजरी व बीज होते हैं।

इन्हीं सब गुणों के कारण प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा होना लाभकारी माना गया है।

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