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राजेंद्र बाबू ने बच्चों को ऐसे दी सीख

राजेंद्र बाबू ने बच्चों को ऐसे दी सीख

राजेंद्र बाबू ने बच्चों को ऐसे दी सीखएक बार डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देखा कि उनकी किसी किताब के कई पन्ने फटे हुए हैं। उन्हें यह बात समझते देर नहीं लगी कि जरूर यह बच्चों का ही काम है।

राजेंद्र बाबू उनसे यह बात कहलवा लेना चाहते थे, मगर वह यह भी चाहते थे कि बच्चों पर कोई आरोप न लगाया जाए। उनके अनुसार ऐसा करने से बच्चों में अपराधी होने की भावना उदय होगी।

आखिर, उन्हें एक उपाय सूझ ही गया। उन्होंने सभी बच्चों को बुलाकर कहा कि जिस बच्चे ने इस पुस्तक के जितने पन्ने फाड़े हैं, उसे उतने ही पैसे इनाम में दिए जाएंगे।

सभी बच्चों ने खुशी-खुशी पन्ने फाड़ने की बात बता दी। उन्हें इनाम भी दिया गया लेकिन राजेंद्र बाबू ने उन्हें समझाया कि पुस्तक के पन्ने फाड़ना कोई अच्छी बात नहीं है। बच्चों को भी यह बात भलीभांति समझ में आ गई। उन्होंने न केवल अपनी गलती कबूल की बल्कि आगे से ऐसा न करने का वादा भी किया।

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