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अगस्‍त क्रांति : 'भयावह' स्थितियों में लड़ाई का 'अहिंसक' तरीका

8 अगस्‍त, 1942 को पारित ‘भारत छोड़ो’ संकल्‍प से भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ की शुरुआत हुई। गांधी जी को लगा कि सत्‍य और अहिंसा के आदर्श की अग्निपरीक्षा की घड़ी आ गई है। विश्‍व युद्ध का दौर था। भारत पर कठोर साम्राज्‍यवादी शासन की तानाशाही जारी थी। धुरी राष्‍ट्रों से हमारी मातृभूमि पर हमले की धमकियां मिल रही थीं। ऐसे माहौल में स्‍वतंत्रता सेनानी एक ऐसी मानवीय रणनीति बनाने में लगे थे जिसमें हत्‍याओं, विनाश और विश्‍वासघात की कोई जगह न हो, ताकि पुरानी सभी गलतियों को सही किया जा सके। उन्‍होंने अपनी इस मुहिम में जीत हासिल कर न सिर्फ अपने आप को सही साबित किया बल्कि मानवता को सभ्‍यता का एक अनोखा पाठ भी सिखाया।

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सीहोर में शहीद हुए 356 क्रांतिकारियों की वह अमर कहानी...

सीहोर में शहीद हुए 356 क्रांतिकारियों की वह अमर कहानी... मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सीहोर में मकर संक्राति का पर्व गुड़, तिल्ली और मिठास के लिए नहीं बल्कि देश की आजादी के संघर्ष में शहीद हुए 356 अनाम शहीदों की शहादत के पर्व के रूप में याद किया जाता है। 

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जब सीहोर के शहीद कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों को ललकारा…

देश में जब अंग्रेजी कुशासन का दौर चल रहा था तब उन्हें सीधे-सीधे चुनौती देने एवं ललकारने का साहस मालवा में सीहोर की धरती पर कुंवर चैन सिंह ने दिखाया।देश में जब अंग्रेजी कुशासन का दौर चल रहा था तब उन्हें सीधे-सीधे चुनौती देने एवं ललकारने का साहस मालवा में सीहोर की धरती पर कुंवर चैन सिंह ने दिखाया। उन्होंने अपने साथियों के साथ फिरंगियों से लोहा लिया उन्हें नाको चने चबवाए लेकिन अंत में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति का पहला शहीद मंगल पांडे को माना जाता है। मगर कुंवर चैन सिंह की शहादत मंगल पांडे के शहीद होने की घटना से भी करीब 33 वर्ष पहले की है।

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अंग्रेजों के खिलाफ सशस्‍त्र विद्रोह करने वाली पहली भारतीय शासक थी रानी चेन्‍नम्‍मा

कित्‍तूरु की महारानी, रानी चेन्‍नम्‍मा एक ऐसी योद्धा थीं जिन्‍होंने 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का नेतृत्‍व किया था जब तमाम शासक अंग्रेजों की साजिशों से परिचित नहीं थे।इस तथ्‍य की जानकारी बहुत कम है कि अंग्रेजों के विरुद्ध ज्‍यादातर विद्रोह दक्षिण भारत में शुरू हुए। 18वीं सदी के अंत में मद्रास प्रेजीडेंसी में पुली थेवर और वीरापंडी कट्टाबोमन, पल्लियाकर (पॉलीगर), 1799 और 1801 के बीच विद्रोह करने वाले मरुडू पांडेयन भाई, 1806 की वेल्‍लोर गदर तथा 1792 से 1805 में केरल में कोट्टयम के पजास्सी राजा का विद्रोह 1857 की क्रां‍ति के पहले के कुछ उदाहरण हैं। सभी विद्रोहियों को फांसी देकर, सिर काटकर या तोपों से उड़ाकर निर्दयता से मार डाला गया था। लेकिन, इन सभी ने माफी मांगने और अंग्रेजों के अधीन रहने से इंकार कर दिया था। (Read in English)

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लड़ने के हौसले का प्रतीक बन गए थे खुदीराम बोस

आज की तारीख में आमतौर पर 19 साल से कम उम्र के किसी युवक के भीतर देश और लोगों की तकलीफों, और जरूरतों की समझ कम ही होती है लेकिन खुदीराम बोस ने जिस उम्र में इन तकलीफों के खात्मे के खिलाफ आवाज बुलंद की, वह मिसाल है, जिसका वर्णन इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।आज की तारीख में आमतौर पर 19 साल से कम उम्र के किसी युवक के भीतर देश और लोगों की तकलीफों, और जरूरतों की समझ कम ही होती है लेकिन खुदीराम बोस ने जिस उम्र में इन तकलीफों के खात्मे के खिलाफ आवाज बुलंद की, वह मिसाल है, जिसका वर्णन इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।

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जयप्रकाश नारायण : ‘संघर्ष’ आजादी से ‘पहले’ भी, आजादी के ‘बाद’ भी...

जयप्रकाश नारायण : ‘संघर्ष’ आजादी से ‘पहले’ भी, आजादी के ‘बाद’ भी...जयप्रकाश नारायण आधुनिक भारत के इतिहास में एक अनोखा स्थान रखते हैं क्योंकि वह अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिनको देश के तीन लोकप्रिय आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेने का अनोखा गौरव प्राप्त है। उन्होंने न केवल अपने जीवन जोखिम में डालते हुए भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी बल्कि सत्तर के दशक में भ्रष्टाचार और अधिनायकवाद के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया और इसके पहले 50 और 60 के दशकों में लगभग 10 वर्ष तक भूदान आन्दोलन में भाग लेकर हृदय परिवर्तन के द्वारा बड़े पैमाने पर सामाजिक परिवर्तन लाने का कार्य भी किया।

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राष्ट्रवादी आंदोलन को मजबूत करने में सुब्रमण्य भारतियार की थी अहम भूमिका

सी. सुब्रमण्य भारतियार एक कवि, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्हें महाकवि भारतियार के नाम से जाना जाता था। महाकवि की सराहनीय उपाधि का अर्थ है, महान कवि।सी. सुब्रमण्य भारतियार एक कवि, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्हें महाकवि भारतियार के नाम से जाना जाता था। महाकवि की सराहनीय उपाधि का अर्थ है, महान कवि। उनकी गिनती भारत के महानतम कवियों में की जाती है। भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद संबंधी उनके गीतों ने तमिलनाडु में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जन समर्थन जुटाने में मदद की थी।

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राम्पा विद्रोह के नायक थे अल्लूरी सीताराम राजू

राम्पा विद्रोह के नायक थे अल्लूरी सीताराम राजूअल्‍लूरी सीताराम राजू भारत भूमि में जन्म लेने वाले ऐसे महान व्यक्ति हैं जिन्होंने मातृ भूमि के बंधनों को तोड़ने के लिए अपने प्राण दे दिए। आज भी तेलुगू प्रांत के लोगों को राम राजू के प्रेरणादायक प्रसंग प्रेरित करते हैं। हालांकि, अंग्रेजों के साथ उनकी लड़ाई दो साल तक ही चली लेकिन उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी और देशवासियों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। (Read in English)

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प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में अवध की थी अहम भूमिका

सन् 1857 का भयावह काल वास्तव में भारतीय राष्ट्र की अनगिनत क़ुर्बानियों व बलिदानों की दास्तान है। करीब 90 साल की इस लम्बी लड़ाई में बहादुर शाह ज़फ़र से लेकर हर उस स्वतंत्रता सेनानी के लिए श्रद्धा से हमारा सर झुक जाता है जिसने देश को स्वराज दिलाने में भूमिका निभाई। इन गतिविधियों का मुख्य केंद्र अवध बना रहा।सन् 1857 का भयावह काल वास्तव में भारतीय राष्ट्र की अनगिनत क़ुर्बानियों व बलिदानों की दास्तान है। करीब 90 साल की इस लम्बी लड़ाई में बहादुर शाह ज़फ़र से लेकर हर उस स्वतंत्रता सेनानी के लिए श्रद्धा से हमारा सर झुक जाता है जिसने देश को स्वराज दिलाने में भूमिका निभाई। इन गतिविधियों का मुख्य केंद्र अवध बना रहा। 

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शौर्य का पर्याय थे बिरसा मुंडा

अंग्रेजों ने जब आदिवासियों से उनके जल, जंगल, जमीन को छीनने की कोशिश की तो उलगुलान यानी आंदोलन हुआ। इस उलगुलान का ऐलान करने वाले बिरसा मुंडा ही थे।लेखिका महाश्वेता देवी का आदिवासी जीवन पर लिखा ‘चोट्टि मुंडा और उसका तीर' उपन्यास आदिवासी जीवन के साथ ही उनके जिस नायक के संघर्ष पर केन्द्रित है, वह हैं बिरसा मुंडा। इस उपन्यास में महाश्वेता देवी ने आदिवासियों द्वारा अपनी आजादी छिन जाने की आहट से बेचैन होने और बिरसा मुंडा के नेतृत्व में उस आजादी को बचाने के संघर्ष को बड़ी खूबसूरती से गूंथा है। बिरसा मुंडा वास्तव में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई के महानायक थे।

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