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अक्षय नवमी त्योहार पर पूजा करने की संपूर्ण विधि

अक्षय नवमी त्योहार पर पूजा करने की संपूर्ण विधि

 अक्षय नवमी त्योहार पर पूजा करने की संपूर्ण विधि अक्षय नवमी का त्योहार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इसको अंखिया नवमी भी कहा जाता है।

इस दिन आंवले की पूजा होती है। अगर आंवले का पेड़ नजदीक न हो ते आंवले की एक डाली तुड़वाकर मंगाई जा सकती है। इसे तुलसी के गमले में लगाकर पूजा कर ली जाती है। आंवले के पेड़ या डाली के चारों ओर कच्चा धागा या सूत लपेटा जाता है।

पूजा के लिए एक दीपकएक बरतन में पानी, रोलीचावलखीलबताशे तथा 108 संख्या में कोई भी वस्तु हो सकती है। पौधे की परिक्रमा लगाते समय हर बार इन 108 वस्तुओं में से एक–एक कर थाली में रखते जाते हैं। दान के लिए कुछ पैसे भी थाली में रख लेते हैं। भजन गाए जाते हैं। पूजा करके सभी सामान माली को दे देते हैं। पूजा के बाद अक्षय नवमी की कहानी सुनाई जाती है। घर में पूड़ी और पकवान बनाए जाते हैं। पूजा करके ही खाना खाने का विधान है। बधाईयां भी गाई जाती हैं।

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