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‘ई गंगा में तो नहा लिया, क्यां न क्यां’

स्वच्छ भारत मिशन- जयपुर जिले में अनूठा नवाचार

राजस्थान के जयपुर जिले में ‘स्वच्छ भारत मिशन‘ के तहत खुले में शौच से मुक्ति के लिए अपनाए गए तरीकों को विश्व बैंक की टीम ने सराहा है। ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने की दिशा में स्कूली बच्चों का भी साथ मिला है। 

जयपुर जिले ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले छः माह में सरपंचों ने अच्छा काम किया है जिससे 532 ग्राम पंचायतों में से 154 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं।

जिला प्रशासन द्वारा अनूठे नवाचार के तहत जिले में ‘स्वच्छ भारत मिशन‘ के तहत जयपुर शहर की बुलंदी पर स्थित ऐतिहासिक ‘नाहरगढ़‘ किले के शिखर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने की दिशा में सराहनीय काम करने वाले करीब डेढ़ सौ सरपंचों को आमंत्रित कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में सरपंचों ने अपनी ग्राम पंचायतों को ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ कराने के लिए अपनाएं गए तरीकों और नवाचारों से जुड़े अनुभव बड़े गर्व के साथ साझा किए। सरपंचों ने इस दौरान पेश आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए जिले में ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ होने से शेष रही ग्राम पंचायतों में जाकर वहां कार्य करने की मंशा भी जताई।

कार्यक्रम में जिला कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने सरपंचों से संवाद करते हुए कहा कि जिले में ‘स्वच्छ भारत मिशन‘ के लिए सरपंचों के नेतृत्व एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने की दिशा में सफलता मिली है। इसका पूरा श्रेय सरपंचों को है। जयपुर जिले में कुछ अलग हटकर प्रयास किए गए, जिसके तहत सरपंच, वार्ड पंच, ग्राम सेवक और प्रधानगण अभियान को कामयांब बनाने के लिए ‘रिसोर्स परसन‘ बनाए गए। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

महाजन ने बताया कि जिले और राज्य की टीम ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ ग्राम पंचायतों का दौरा करेगी और सत्यापन की इस प्रक्रिया के बाद केन्द्र सरकार की योजना के तहम ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ ग्राम पंचायतों को 20-20 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। उन्होंने कहा कि आगामी मार्च माह तक जिले की करीब आधी ग्राम पंचायतों को ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ कराने का लक्ष्य है, इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष के पहले आठ महीनों में शेष ग्राम पंचायतों को ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ बनाते हुए पूरे जिले को ‘खुले में शौच से मुक्त‘ बनाने के लक्ष्य के साथ स्वच्छ भारत मिशन में कार्य किया जा रहा है। 

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक रंजन ने भी सरपंचों के प्रयासों की तारीफ की और उन्हें प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में जिले की पंचायत समितियों के प्रधान, विकास अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधिगण व अन्य अधिकारी अधिकारी भी मौजूद रहे। 

कार्यक्रम में शाहपुरा में छारसा ग्राम पंचायत के सरपंच सीताराम ने बताया कि उन्हें स्कूली बच्चों का बहुत साथ मिला, कई बच्चों ने अपने माता-पिता को कह दिया कि वे स्कूल तब जाएंगे जब उनके घर में शौचालय बन जाएगा। फागी में मोहबतपुरा के सरंपच हनुमानमल ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन एक है और इसके फायदे अनेक है। उन्होंने कहा कि विकास अधिकारी ने उन्हें पंचायत प्रसार अधिकारी उपलब्ध कराए और टीम के रूप में कार्य करते हुए सफलता प्राप्त की। नायला के सरपंच मोहन मीणा ने बताया कि जब खुले में शौच से मुक्त के अभियान को आगे बढ़ाया तो कई पढ़े-लिखे लोगों ने भी अजीब तर्क दिए लेकिन अंततः सब को समझाते हुए कामयाबी मिली। 

जालसू पंचायत समिति की भानपुरकलां ग्राम पंचायत के वयोवृद्ध सरपंच रामसहाय ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि खुले में शौच से मुक्त के लिए प्रयास करने के दौरान कई दिक्कतें आईं मगर उन्हें पार करते हुए उनकी ग्राम पंचायत ने मंजिल को पा लिया। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि ‘ई गंगा में तो नहा लिया क्यां न क्यां, बूढा ठेरा ने भी ताण दिया‘ (सबके सहयोग से मंजिल पाई, बड़े बुजुर्गों को भी प्रयास कर समझाया गया)। 

जमवारामगढ़ की सरपंच सुमित्रा जोशी ने बताया कि उन्हें बस स्टैंड पर गंदगी देखकर सदैव पीड़ा होती थी। जब इस अभियान के तहत उन्हें अवसर मिला तो ग्राम पंचायत को खुले में शौच से मुक्त कराने के क्रम में उन्होंने बस स्टैण्ड पर सुलभ कॉम्पलैक्स का निर्माण कराया। ग्रामवासियों के सहयोग से आज बस स्टैण्ड की सूरत बदली नजर आती है। साम्भर की काजीपुरा पंचायत के सरपंच नवरत्न कुमावत ने बताया कि उन्होंने ‘खुले में शौच से मुक्त ‘ की मुहिम में विशेषकर बड़े विद्यालयों के बच्चों और अध्यापकों का सहयोग मिला। बस्सी में तुंगा पंचायत के सरपंच उमाकांत शर्मा ने बताया कि उन्होंने ढाणी-ढाणी गए और मॉर्निंग फॉलो-अप के तहत ढोल बजाकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिले में वह इस मुहिम को आगे ले जाने में बढ़ चढ़कर सहयोग करने को तैयार हैं। 

झोंटवाड़ा पंचायत समिति में माचवा के सरपंच रामफूल बावरियां ने बताया कि उन्होंने अपनी विकास अधिकारी के सहयोग से महिला वार्ड पंच, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनकी पंचायत में एक ऐसा घर था, जहां शौचालय बनाने के लिए जमीन नहीं थी, फिर भी उसके मुखिया ने स्वच्छता की मुहिम से प्रेरित होकर किचन की जगह को कम करते हुए वहां शौचालय का निर्माण कराया। 

गोनेर की सरपंच ने कहा कि उनकी ग्राम पंचायत का जब भी किसी काम में नाम होता है तो हम गांववासी उसे जगदीशजी महाराज की कृपा मानते है। खुले में शौच से मुक्त का काम भी उनकी कृपा से ही हुआ है और अब ग्राम पंचायत ‘कैशलेस‘ होने की ओर अग्रसर है। 

गोविन्दगढ़ पंचायत समिति में जयसिंहपुरा के सरपंच तरुण कुमार यादव ने बताया कि जब सरपंच बने तो खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायत बनाने में बड़ी दिक्कतें थीं। आम रास्ते पर शौच के लिए महिलाओं की कतार लगती थी। रात में वाहनों की लाइट ऐसी कतारों पर पड़ती थी। ऐसे में खुले में शौच को हमने महिलाओं के आत्मसम्मान से जोड़कर लोगों को प्रेरित किया और धीरे-धीरे स्थितियां बदल गईं। 

कलवाड़ा (सांगानेर) के सरपंच डॉ. हरिनारायण स्वामी ने बताया कि उनकी पंचायत में धनाढ्यों को शौचालय विहीन कमजोर तबके के लोगों के घरों में टायलेट बनवाने में सहयोग के लिए प्रेरित किया गया। दूदू में आकोदा के सरपंच देवकरण गुर्जर ने कहा कि वह स्वयं नशे व गुटखे का सेवन नहीं करते। लोगों को भी पाउच वगैरह इधर-उधर नहीं बिखेरने के लिए प्रेरित करते हैं। यदि उन्हें कहीं पाउच आदि मिलते है तो वह स्वयं एकत्रित कर उन्हें जलाते हैं।

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