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कहीं काल न बन जाए काला दमा

कहीं काल न बन जाए काला दमाकाला दमा के मरीजों के लिए सर्दी कई तरह की मुश्किलें लेकर आती है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित अधिकांश मरीजों को सालभर उतनी दिक्कत नहीं होती जितनी सिर्फ जाड़े के दिनों में होती हैं। जाड़ों के चार महीने यानी नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी, काला दमा के मरीजों के लिए बेहद कष्टकारक होते हैं। इस दौरान अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ जाती है।

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