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दिल तोड़कर वो खुश है तो शिकायत कैसी?

दिल तोड़कर वो खुश है तो शिकायत कैसी?

ज़िंदगी को करीब से समझना हो और चंद अल्फाज़ों में समेटना हो तो शायरी से बेहतर भला क्या हो सकता है। कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जो शायरी कहने, पढ़ने या लिखने को फिज़ूल समझते हों लेकिन बहुत से ऐसे भी होते हैं, जिनकी ज़िंदगी इसके इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है।

शायरी की ताक़त की बात की जाए तो यह सिर्फ इस बात से ही समझी जा सकती है कि देश के दासता वाले दौर में भी ये शायद शायरी ही थी जो क्रान्तिकारियों को हौसला देती थी। शायरों ने ज़िंदगी के हर पहलू पर अपनी कलम चलाई है। हालातों की नब्ज़ से वाकिफ कराने के लिए शायरी की चंद पंक्तियां ही काफी होती हैं।

यहां, ऐसे ही कुछ शायरों के लिखे अल्फाजों को आवाज दी है कुमार आकाश ने। इस वीडियो में आप अहसास कर पाएंगे चाहत की असल परिभाषा को, मुहब्बत के जज़्बातों को, खामोशी की आवाजों को, सच-झूठ की सरहदों को और परिंदों की उड़ानों को। सुनिए और कुछ ही पलों में जिंदगी के अहसासों को करीब से महसूस कीजिए...

वीडियो देखें

Last modified onMonday, 25 March 2019 17:27
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